Homeहमारी धऱतीकृषिगोबर के बाद गौमूत्र को लेकर छत्तीसगढ़ ने उठाया ये बड़ा कदम....

गोबर के बाद गौमूत्र को लेकर छत्तीसगढ़ ने उठाया ये बड़ा कदम….

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रायपुर, 29 जुलाई ( गणतंत्र भारत के लिए शोध डेस्क ) : छतीसगढ़ में सरकार ने गौमूत्र को खऱीदना शुरू कर दिया है। ऐसा करने वाला छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य है।  मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने 28 जुलाई को मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में हरेली (हरियाली अमावस्या) पर्व के अवसर पर गोमूत्र की खरीद की शुरुवात की।

आधिकारिक जानकारी के अनुसार, मुख्यमंत्री इस मौके पर चंदखुरी की निधि स्व-सहायता समूह को पांच लीटर गोमूत्र 20 रुपए में बेचकर राज्य के पहले विक्रेता बने। निधि स्व-सहायता समूह ने गोमूत्र बेचा और ये राशि मुख्यमंत्री सहायता कोष के खाते में जमा कर दी गई। छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य है, जो पशुपालक ग्रामीणों से दो रुपए प्रति किलोग्राम की दर से गोबर खरीदने के बाद अब चार रुपए लीटर में गोमूत्र खरीद रहा है।

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इस अवसर पर कहा कि, गोधन न्याय योजना के बहुआयामी परिणामों को देखते हुए देश के अनेक राज्य इसे अपनाने लगे हैं। इस योजना के तहत अमीर हो या गरीब सभी दो रुपए किलो गौठानों में गोबर बेच रहे हैं। बीते दो वर्षों में गोधन न्याय योजना के माध्यम से गोबर विक्रेताओं, गौठान समितियों और महिला समूहों के खाते में 300 करोड़ रुपए से अधिक की राशि अंतरित हुई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि, छत्तीसगढ़ में खेती-किसानी समृद्ध हो, किसान खुशहाल हो – यही हमारी कोशिश है। जैविक खाद और जैविक कीटनाशक का उपयोग करने से खेती की लागत में कमी आएगी। खाद्यान्न की गुणवत्ता बेहतर होगी जिससे जन-जीवन का स्वास्थ्य बेहतर होगा। उन्होंने कहा कि इस योजना का उद्देश्य राज्य में पशुपालन के संरक्षण और संवर्धन के साथ-साथ पशुपालक की आय और जैविक खेती को बढ़ावा देना है।

आपको बता दें कि, गोधन न्याय योजना की शुरुआत छत्तीसगढ़ में दो वर्ष पहले 20 जुलाई, 2020 को हरेली पर्व के दिन से हुई थी जिसके तहत गौठनों में पशुपालक ग्रामीणों से दो रुपए प्रति किलोग्राम की दर से गोबर खरीदी जा रही है। गोबर खरीद के जरिए बड़े पैमाने पर जैविक खाद का निर्माण और उसके उपयोग के उत्साहजनक परिणामों को देखते हुए अब गोमूत्र खरीद कर इससे कीट नियंत्रक उत्पाद और ग्रोथ प्रमोटर बनाए जाएंगे। इसके पीछे एक मकसद खाद्यान्न उत्पादन की विषाक्तता को कम करने के साथ ही खेती की लागत को भी कम करने का है।

आंकड़ों की बात करें तो, राज्य में बीते दो वर्षों 76 लाख क्विंटल से अधिक गोबर खरीदी गई है, जिसके एवज में गोबर विक्रेता ग्रामीण पशुपालकों को 153 करोड़ रुपए से अधिक की राशि का भुगतान किया गया है।

कीमत निर्धारण

छत्तीसगढ़ सरकार ने फरवरी 2022 में गोमूत्र खरीदने का फैसला कर पूरी योजना पर खरीद और शोध की विधि तय करने के लिए एक समिति का गठन किया था। समिति ने जुलाई के पहले सप्ताह में एक प्रस्ताव पेश किया जिसके बाद राज्य सरकार ने खरीद की दरें तय कीं।

15 जुलाई 2020 को भूपेश बघेल मंत्रिमंडल ने गोधन न्याय योजना के तहत गो-पालक किसानों से दो रुपए प्रति किलोग्राम की दर से गोबर खरीदने को मंजूरी दी थी। बैठक में राज्य के महत्वाकांक्षी कार्यक्रम ‘नरवा, गरूवा, घुरूवा और बाड़ी’ के स्वीकृत गोठानों (गोशाला) को रोजगारोन्मुख बनाने के लिए इस का अनुमोदन किया गया था।

अन्य राज्यों में योजना पर विचार

छत्तीसगढ़ सरकार के इस कदम के बाद देश में कई अन्य राज्यों की सरकारें भी इस दिशा में योजना बनाने की तैयारी कर रही हैं। कुछ राज्यों में गौधन को लेकर दूसरी योजनाएं पहले से चल रही हैं।

फोटो सौजन्य-सोशल मीडिया

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