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अमेरिका में वीरदास के दो – भारत…पर भारत में मची क्यों जंग ?

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नई दिल्ली ( गणतंत्र भारत के लिए आशीष मिश्र ) : स्टैंड अप कॉमेडियन वीरदास ने वॉशिंगटन डीसी के ज़ॉन एफ कैनेडी सेंटर में अपना शो पेश किया। इस शो में उन्होंने एक मोनोलॉग प्रस्तुत किया जिसका शीर्षक था – आई कम फ्रॉम टू इंडियाज़ यानी मैं दो भारत से आता हूं। शीर्षक से ही जाहिर है इस मोनोलॉग में भारत के दोहरेपन, विरोधाभास और पाखंड का जिक्र है। इस मोनोल़ॉग में ऐसा था भी। इस शो से संबंधित एक संक्षिप्त वीडियो को वीरदास ने यू ट्यूब पर शेयर किया। बस क्या था बवाल मच गया।

सोशल मीडिया पर वीरदास के शो को लेकर काफी होहल्ला मचा है। बुद्धिजीवियों से लेकर राजनेताओं तक में वीरदास भी बंट गए। एक सज्जन को तो वीरदास की बातें इतनी बुरी लग गईं कि उन्होंने मुंबई में उनके खिलाफ पुलिस में रिपोर्ट दर्ज करा दी। रिपोर्ट दर्ज कराने वाले आशुतोष दुबे नाम के इस शख़्स ने अपनी शिकायत में लिखा कि, वीरदास ने भारत के ख़िलाफ़ अभद्र दिप्पणी की है। उन्होंने ऐसे बयान दिए हैं  जिससे प्रतीत होता है कि भारत का लोकतंत्र ख़तरे में हैं जो कि एक निराधार आरोप है।

विवाद पर वीरदास ने क्या कहा

इस बीच, वीरदास ने ट्विटर पर जारी एक बयान में अपना पक्ष रखने की कोशिश की है। उन्होंने कहा कि, मैंने जो वीडियो जारी किया वो भारत के दोहरेपन को लेकर है।  दो पक्ष जो एक दूसरे से बिल्कुल अलग हैं जैसा कि हर देश में होता है। उन्होंने कहा कि, इस वीडियो का मक़सद ये बताना है कि हेडलाइन के अलग हमारा देश बहुत कुछ है, इसकी गहराई और ख़ूबसूरती। इस वीडियो के छोटे से हिस्से से आपको भरमाया जा रहा है, ऐसा मत होने दीजिए…..मुझे मेरे देश पर गर्व है और मैं ये गर्व अपने साथ लेकर चलता हूं…..अगर लोग भारत के सम्मान में खड़े होते हैं तो मेरे लिए ये गौरव की बात है।…..हमें रोशनी पर फ़ोकस करना है… हम क्यों महान हैं ये याद रखना है और लोगों में प्यार बांटना है।

दो भारत पर आपत्ति क्यों ?

वीरदास ने अपने मोनलॉग में एक ऐसे भारत की तस्वीर पेश की है जो तमाम तरह के विरोधाभासों से भरा है। उन्होंने अपने शो में भारत में महिलाओं की स्थिति, राजनीति, वैचारिक मतांतर, पर्यावरण, धार्मिक पाखंड जैसे विषयों को उठाया है जो समाज में आज की हकीकत हैं। लेकिन, वीरदास के मोनोलॉग में कटाक्ष के लिए जिस तरह के प्रतीकों और उदाहरणों को चुना गया उससे राजनीतिक संदेश भी मिलता था और यहां से उनके पक्ष और विपक्ष में गोलबंदी शुरू हो गई। पत्रकार, बरखा दत्त और वीर सांघवी ने वीरदास को उनकी बहादुरी और बेबाकी के लिए सराहा।

कांग्रेस नेता शशि थरूर और कपिल सिब्बल ने ट्वीट करके वीरदास की पीठ थपथपाई लेकिन इसी पार्टी के अभिषेक मनु सिंघवी से वीरदास की आलोचना की। शशि थरूर ने अपने ट्वीट में कहा कि, एक स्टैंडअप कॉमेडियन जिसे सही मायने में ‘स्टैंड-अप’ होने का मतलब पता है, शारीरिक नहीं बल्कि नैतिक आधार पर खड़े होने का अर्थ जानता है। वीर दास ने लाखों लोगों की तरफ़ से बोला है। अपने 6 मिनट के वीडियो में उन्होंने दो तरह के भारत की बात की है और बताया है कि वो किस भारत के लिए खड़े हैं। ये जोक तो है लेकिन मज़ाकिया बिल्कुल नहीं माना जा सकता।

कपिल सिब्बल अपने ट्वीट में कहते हैं कि, वीर दास इसमें कोई शक नहीं है कि दो भारत है। हम नहीं चाहते हैं कि एक भारतीय दुनिया को इस बारे में बताए। हम असहिष्णु और पाखंडी हैं।

लेकिन, कांग्रेस नेता नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने वीर दास के मामले में एकदम उल्टी लाइन ली और उनकी आलोचना की। उन्होंने अपने ट्वीट में कहा कि, कुछ लोगों की बुराइयों को पूरे देश के बारे में आम बना कर पेश करना और देश को दुनिया के सामने बदनाम करना ठीक नहीं है। सोशल मीडिया पर वीरदास के शो के विरोध में भी काफी सुर उठे। एक यूजर ने ट्विटर पर लिखा कि, वीरदास जैसे लोगों को इस देश में सिर्फ बुराई ही क्यों नजर आती है। भारत से बाहर कम से कम ऐसी हरकतों से बचना चाहिए। एक दूसरे यूजर लिखते हैं कि, भारत सचमुच में दो भारत है। लेकिन दो भारत कैसे एक बने, कैसे बेहतर बने इस बारे में सोचिए।   

वीरदास ने अपने मोनोल़ॉग में कहा क्या

वीरदास ने यूट्यूब पर 6 मिनट का एक वीडियो पोस्ट किया है। इस वीडियो में उन्होंने दो भारत की कहानी को बयां किया है। न्यूज़ वेबसाइट बीबीसी हिंदी ने उस मोनोलॉग को हिंदी में प्रकाशित किया है। गणतंत्र भारत उसमें से मुख्य अंशों को साभार प्रकाशित कर रहा है :  

मैं उस भारत से आता हूं…. जहां बच्चे एक दूसरे का हाथ भी मास्क पहन कर पकड़ते हैं.., लेकिन नेता बिना मास्क एक-दूसरे को गले लगाते हैं।

मैं उस भारत से आता हूं…जहां एक्यूआई 900 है लेकिन हम फिर भी अपनी छतों पर लेटकर रात में तारे देखते हैं।

मैं उस भारत से आता हूं…. जहां हम दिन में औरतों की पूजा करते हैं और रात में उनका गैंगरेप हो जाता है।

मैं एक ऐसे भारत से आता हूं.. जहां पत्रकारिता ख़त्म हो चुकी है.. मर्द पत्रकार एक दूसरे की वाहवाही कर रहे हैं…

और महिला पत्रकार सड़कों पर लैपटॉप लिए बैठी हैं… सच्चाई बता रही हैं…

मैं उस भारत से आता हूं… जहां हमारी हंसी की खिलखिलाहट हमारे घर की दीवारों के बाहर तक आप सुन सकते हैं…

और मैं उस भारत से भी आता हूं…जहां कॉमेडी क्लब की दीवारें तोड़ दी जाती हैं… जब उसके अंदर से हंसी की आवाज़ आती है…

मैं उस भारत से आता हूं, जहां बड़ी आबादी 30 साल से कम की है लेकिन हम 75 साल के नेताओं के 150 साल पुराने आइडियाज़ सुनना बंद नहीं करते…

मैं ऐसे भारत से आता हूं… जहां हमें पीएम से जुड़ी हर सूचना दी जाती है लेकिन हमें पीएम केयर्स की कोई सूचना नहीं मिलती….

मैं उस भारत से आता हूं… जहां हम शाकाहारी होने में गर्व महसूस करते हैं लेकिन उन्हीं किसानों को कुचल देते हैं, जो ये सब्ज़ियां उगाते हैं…

मैं उस भारत से आता हूं… जहां सैनिकों को हम पूरा समर्थन देते हैं तब तक… जब तक उनकी पेंशन पर बात न की जाए….

मैं उस भारत से आता हूं, जो चुप नहीं बैठेगा….

मैं उस भारत से आता हूं.. जो बोलेगा भी नहीं…

मैं उस भारत से आता हूं जो मुझे हमारी बुराइयों पर बात करने के लिए कोसेगा…

मैं उस भारत से आता हूं, जो लोग अपनी कमियों पर खुल कर बात करते हैं….

मैं उस भारत से आता हूं, जो ये देखेगा और कहेगा ‘ये कॉमेडी नहीं है.. जोक कहां है?..

और मैं उस भारत से भी आता हूं…जो ये देखेगा और जानेगा कि ये जोक ही है… बस मज़ाकिया नहीं है….

फोटो सौजन्य- सोशल मीडिया

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