ट्विटर हुआ मस्क का, फ्री स्पीच को बढ़ावा, फर्जी यूजरों पर गिरेगी गाज

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सैन फ्रांसिस्को (गणतंत्र भारत के लिए न्यूज़ डेस्क और एजेंसियां) : आखिरकार सोशल नेटवर्किग और माइक्रोब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म ट्विटर दुनिया के सबसे अमीर आदमी एलन मस्क का हो गया। मस्क ने इस सौदे के लिए 44 अरब डॉलर देने का प्रस्ताव दिया था जिसे ट्विटर ने स्वीकार कर लिया। इस सौदे के साथ ही सार्वजनिक रूप से कारोबार करने वाली फर्म ट्विटर अब मस्क के स्वामित्व वाली एक निजी कंपनी बन जाएगी। इससे पहले, मस्क ने ट्विटर को 43 से 48 बिलिय़न डॉलर के बीच खरीदने का प्रस्ताव किया था। ट्विटर ने कहा है कि कंपनी की कीमत 54.20 डॉलर प्रति शेयर के हिसाब से लगाई गई है जो कुल 44 अरब डॉलर की बैठती है। एलन मस्क, टेस्ला, द बोरिंग कंपनी, स्पेस एक्स और न्यूरा लिंक जैसी बड़ी कंपनियों के मालिक हैं।

फोर्ब्स पत्रिका के अनुसार, एलन मस्क की कुल परिसंपत्ति 273.6 बिलियन डॉलर है। उनकी संपत्ति का ज्यादातर हिस्सा इलेक्ट्रिक वाहन निर्माता कंपनी टेस्ला में उनकी हिस्सेदारी के कारण है। वे एयरोस्पेस फर्म स्पेसएक्स के अलावा, द बोरिंग और न्यूरा लिंक जैसी कंपनी के भी मालिक हैं।

पहले, इस डील को लेकर ट्विटर के संस्थापकों के बीच मतभेद की खबरें सामने आ रही थीं। ट्विटर के संस्थापकों में जैक डॉर्सी, बिज स्टोन, इवान विलियम्स और नोह ग्लास शामिल थे। ट्विटर के सीईओ भारतीय मूल के पराग अग्रवाल हैं।

मस्क ने एक बयान जारी करते हुए ट्वीट किया है कि, फ्री-स्पीच एक कार्यशील लोकतंत्र का आधार है, और ट्विटर डिजिटल की दुनिया का एक टाउन स्क्वायर है जहां मानवता के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण मामलों पर बहस होती है। मैं भी नई सुविधाओं के साथ ट्विटर को पहले से कहीं बेहतर बनाना चाहता हूं। लोगों में प्लेटफॉर्म को लेकर विश्वास बढ़ाने के लिए एल्गोरिदम को ओपन-सोर्स बनाना, स्पैम बॉट्स को हटाना और सभी लोगों की पहचान को प्रमाणित करना इसमें शामिल होगा।

कठिन समय में कठिन कदम

ट्विटर की स्थापना 21 मार्च 2006 को की गई थी। दुनिया में इस समय करीब 21 करोड़ लोग ट्विटर के प्लेटफॉर्म पर हैं। अमेरिका में सबसे ज्यादा करीब 8 करोड लोग ट्विटर पर हैं जबकि दूसरे नंबर पर जापान में करीब 6 करोड़ ट्विटर के यूज़र हैं। भारत में भी ट्विटर के करीब ढाई करोड़ यूज़र हैं। मस्क ने ट्विटर को खऱीदने का जोखिम ऐसे समय में लिया है जब ट्विटर को अपने प्लेटफॉर्म पर दिखाई देने वाली सामग्री पर राजनेताओं और नियामकों के बढ़ते दबाव का सामना करना पड़ रहा है।

गलत सूचनाओं से निपटने के अपनो प्रयासों के लिए ट्विटर को दक्षिणपंथी और वामपंथी दोनों ही ओर से आलोचनाओं का शिकार होना पड़ रहा है। हालांकि ट्विटर ने कई बार साहसिक काम भी किए हैं। खासकर तब जब उसने बीते साल पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनॉल्ड ट्रंप को अपने प्लेटॉफर्म से हिंसा के लिए उकसाने के जोखिम का हवाला देते हुए बैन कर दिया था।

फोटो सौजन्य – सोशल मीडिया

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