Homeपरिदृश्यटॉप स्टोरीक्या है मजबूरी....ट्रूडो क्यों अपने देश की लुटिया डुबोने पर तुले हैं...?

क्या है मजबूरी….ट्रूडो क्यों अपने देश की लुटिया डुबोने पर तुले हैं…?

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नई दिल्ली (गणतंत्र भारत के लिए सुरेश उपाध्याय) :  रिश्तों में खटास तो पहले से ही थी, अब इनमें खासी कड़वाहट भी भर गई है। 23 जून 1985 को एयर इंडिया का कनिष्क विमान खालिस्तानी आतंकवादी हमले का शिकार हुआ था। इस घटना में क्रू के 22 सदस्यों के साथ ही विमान में सवार सभी 329 लोग मारे गए थे। इस उड़ान में भारत के साथ ही कनाडा के भी कई नागरिक सवार थे। इस घटना पर कनाडा सरकार का रवैया बेहद आपत्तिजनक था। हादसे के आरोपियों के प्रति उसका रुख खासा नरम था। माना जाता है कि खुफिया एजेंसियों के साथ ही कनाडा की सरकार को भी इस विमान में बम रखे जाने की खबर थी, लेकिन इस आतंकवादी वारदात को रोकने की कोई कोशिश नहीं की गई। इस घटना के बाद से कनाडा और भारत के रिश्तों में दरार पड़ गई, लेकिन दोनों के राजनयिक और कारोबारी रिश्ते जारी रहे।

इस दरार को अब कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रुडो के इस आरोप ने और चौड़ा कर दिया है कि जून में कनाडा में मारे गए खालिस्तानी नेता हरदीप सिंह निज्जर की हत्या में भारतीय एजेंटों का हाथ था। निज्जर भारत के मोस्ट वांटेड आतंकवादियों की लिस्ट में शामिल था। भारत की एनआईए ने निज्जर पर 10 लाख रुपये का इनाम घोषित किया हुआ था। ट्रुडो के इस आरोप का भारत ने कड़ा खंड़न किया और कनाडा से सबूत देने को कहा। कनाडा में विपक्ष के नेता पियरे पोइलिवरे ने भी ट्रुडो के इस आरोप को चैलेंज किया है और उनसे इस बाबत सबूत देने को कहा है। ट्रुडो ने ये आरोप कनाडा की संसद में लगाया। इसके बाद कनाडा और भारत ने दोनों देशों के एक-एक राजनयिक को देश छोड़ने को कहा। भारत ने अब कनाडा जाने और वहां रहने वाले भारतीय नागरिकों के लिए एक एडवाइजरी जारी की है और इसके साथ ही कनाडाई नागरिकों के लिए वीजा सेवाएं निलंबित कर दी हैं।

अलगाववादियों का गढ़

इस कड़वाहट के बाद अब अलगाववादी खालिस्तानी नेता गुरपतवंत सिंह ने कनाडा में रह रहे भारतीय नागरिकों को कनाडा छोड़ने की धमकी दी है। इसके लिए वह बाकायदा कैंपेन चला रहा है। पन्नू को भारत सरकार ने आतंकवादी घोषित किया हुआ है। उस पर राजद्रोह के तीन मामलों समेत 22 केस दर्ज हैं। वह मूल रूप से अमृतसर का है और अब कनाडा़ में रह रहा है। भारत सरकार के कई मोस्ट वांटेड और गैंगस्टर इस समय कनाडा में रह रहे हैं और कनाडा भारत के अनुरोध के बावजूद इनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है। कनाडा में रह रहे खालिस्तान समर्थक अब वहां ओटावा में 25 सितंबर को एक बड़ा प्रदर्शन करने जा रहे हैं।

पन्नू और उसके साथियों की धमकी के बाद कनाडा में रह रहे भारतीय हिंदू चिंतित हैं। वहां पेशेवरों और कारोबारियों के साथ ही लाखों की संख्या में भारतीय छात्र भी हैं। हर साल लाखों भारतीय छात्र पढ़ाई के लिए कनाडा जाते हैं। पिछले साल करीब सवा दो लाख भारतीय छात्र कनाडा गए थे। कनाडा की इकॉनमी में इनका बड़ा योगदान है। वहां के शिक्षा संस्थानों के जरिए भारतीय छात्र कनाडा को हर साल अरबों डॉलर देते हैं। उन्हें आशंका है कि अगर भारत और कनाडा के रिश्ते और खराब होते हैं तो उनके लिए दिक्कतें खड़ी हो सकती हैं।

कनाडा के ओंटेरियो प्रांत में रह रहे एक छात्र ने बताया कि यहां फिलहाल हालात सामान्य हैं और भारतीय स्टूडेंट्स अपना काम नियमित रूप से कर रहे हैं। बताते हैं कि वेंकूवर, मिसिसागा और ब्रैम्पटन में रहने वाले भारतीय हिंदू ज्यादा चिंतित हैं, क्योंकि इन क्षेत्रों में खालिस्तान समर्थक बड़ी तादाद में रहते हैं और सिखों के वोट हासिल करने के लिए ही ट्रुडो खालिस्तानियों के प्रति नरम रुख रखते हैं। भारतीय छात्र कनाडा में पढ़ाई के साथ ही विभिन्न प्रतिष्ठानों में काम करके अपना खर्चा चलाते हैं। अगर हालात खराब हुए तो इन छात्रों को बहुत सी जगहों पर काम मिलना मुश्किल हो जाएगा और उनके लिए फिर कनाडा में रह पाना भी आसान नहीं होगा। इन छात्रों में से ज्यादातर के अभिभावक अपने जीवन भर की कमाई लगाकर बच्चों को कनाडा भेजते हैं और ये फिर बच्चे वहां काम करके अपनी पढ़ाई के साथ ही अन्य खर्चों का इंतजाम करते हैं।

ट्रुडो सरकार और सिख सांसद

इस समय कनाडा की संसद में 16 सिख सांसद हैं और इनके दम पर ट्रुडो की सरकार चल रही है। उनके पिता का रुख भी अलगाववादियों के प्रति नरम था। कनाडा के खालिस्तानी अलगाववादियों को लंबे समय से पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई का भी सहयोग मिल रहा है। बताया जाता है कि ओटावा में होने वाले प्रदर्शन के लिए भी आईएसआई पन्नू और उसके साथियों की मदद कर रही है। वह पाकिस्तानी नागरिकों से भी इस प्रदर्शन में पहचान बदलकर शामिल होने को कह रही है। खालिस्तान के समर्थन में दुनिया के किसी भी कोने में होने वाले प्रदर्शन में पन्नू का हाथ रहता है।

फोटो सौजन्य – सोशल मीडिया  

 

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