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लंपी वायरस बना गोवंश के लिए बड़ा खतरा, दूध की कमी होने कीआशंका

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नई दिल्ली, 11 सितंबर (गणतंत्र भारत के लिए सुरेश उपाध्याय) : देश के मवेशियों के लिए लंपी स्किन डिजीज एक बड़ी मुसीबत बनती जा रही है। इसका दायरा अब तक 13 राज्यों में फैल चुका है और हजारों मवेशियों, खासकर गायों की जान इसके कारण जा चुकी है। इसका सबसे ज्यादा असर राजस्थान में देखा जा रहा है। यहां अब तक करीब 50 हजार गायों की जान पर ये रोग भारी पड़ चुका है। इस रोग के फैलने के साथ आने वाले समय में देश में दूध की कमी होने का अंदेशा भी उठ खड़ा हुआ है। विशेषज्ञों के अनुसार, लंपी रोग अधिकतर उन राज्यों में ज्यादा फैला है जहां पशुधन ज्यादा हैं और वे राज्य दूध उत्पादन के क्षेत्र में अग्रणी राज्यों में शामिल हैं।

राजस्थान के अलावा दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश, हिमाचल, महाराष्ट्र, गुजरात.मध्य प्रदेश, उत्तराखंड और अंडमान निकोबार आदि में भी ये बीमारी पैर फैला चुकी है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर सतर्कता नहीं बरती गई तो ये रोग पूरे देश के मवेशियों को अपनी चपेट में ले सकता है। ये गोवंश में ज्यादा तेजी से फैल रहा है।

केजरीवाल सरकार के मंत्री गोपाल राय ने एक बयान जारी करके बताया है कि दिल्ली में अब तक 173 गायों में इस रोग का संक्रमण पाया गया है और राज्य सरकार इसकी रोकथाम के लिए आपात प्रयासों में जुट गई है। दिल्ली सरकार ने एक हेल्पलाइन नंबर भी जारी किया है।

क्या है इस रोग की वजह

इस रोग की वजह पॉक्स विरिडे फैमिली का नीथलिंग नाम का एक वायरस है। मवेशियों पर इसका पहला असर 1929 में दक्षिण अफ्रीका में सामने आया था। भारत के साथ ही यूरोप, चीन, भूटान, नेपाल और बांग्लादेश में भी इसके मामले अलग-अलग समय पर सामने आए हैं। पशुओं में इसका प्रसार मच्छरों या खून पीने वाले कीटों के कारण होता है। इसके असर से पशु की त्वचा पर गांठें बन जाती हैं और उसे तेज बुखार हो जाता है। उसके अहम अंगों में सूजन भी हो सकती है। अगर मवेशी को समय पर इलाज न मिले तो उसकी मौत भी हो सकती है। इससे बचाव का सही तरीका वैक्सीनेशन है। इससे मवेशियों का इस रोग से काफी हद तक बचाव हो जाता है। कई राज्यों में मवेशियों का टीकाकरण शुरू कर दिया गया है। इस रोग से बचाव के लिए टीके का विकास देश में ही किया गया है। ये रोग मवेशियों से इंसानों में नहीं फैलता।

सरकारों की लापरवाही से फैला

सूत्रों का कहना है कि अगर केंद्र और राज्य सरकारें समय से सतर्क हो जातीं तो ये रोग देश में बड़े पैमाने पर नहीं फैलता। राजस्थान में ये बहुत बड़े पैमाने पर फैल चुका है। बताते हैं यहां अब तक करीब 50 हजार गायों की जान इसके कारण जा चुकी है। उनके अंतिम संस्कार का भी इंतजाम ठीक से नहीं किया जा रहा है। अकेले बीकानेर और आसपास के इलाकों में गायों के शव बहुत बड़े इलाके में फैले हुए हैं। इसके कारण बीजेपी गहलोत पर खासी हमलावर है। उसका कहना है कि राज्य में हजारों गायें बीमारी के कारण मर गई हैं और गहलोत को कांग्रेस की रैली से फुरसत नहीं है।

कहीं हो न जाए दूध की कमी

इस बीमारी का प्रकोप उन राज्यों में ज्यादा है जो दूध उत्पादन के लिए जाने जाते हैं। मवेशियों के बड़े पैमाने पर बीमार होने कारण दूध उत्पादन में कमी दर्ज की जा रही है। इसके कारण कई राज्यों में सप्लाई कम होने से दूध के दाम भी बढ़ गए हैं। लंपी रोग की चपेट में आए पशु का दूध सेहत के लिए नुकसानदेह हो सकता है। पशु के पूरी तरह स्वस्थ होने के करीब 15 दिन बाद ही उसके दूध का सेवन किया जाना चाहिए।

फोटो सौजन्य- सोशल मीडिया

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