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अरुणाचल में चीनी गांव का सच, मोदी की क्लीनचिट और पेंटागन की रिपोर्ट…

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नई दिल्ली (गणतंत्र भारत के लिए सुहासिनी) : अमेरिकी रक्षा मंत्रालय पेंटागन की  एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि चीन ने भारत के अरुणाचल प्रदेश के भीतर करीब साढ़े चार किलोमीटर तक घुसपैठ की और वहां गांव बसा लिए। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि, ये गांव दोहरे उपयोग के है।  यहां न केवल नागरिक आबादी है बल्कि चीनी सेना के लिए ये एक छावनी के रूप में भी ये काम करते हैं। इसे भारत की सुरक्षा के लिहाज से एक बड़ा खतरा माना जा सकता है।

सुब्रमणियम स्वामी ने लगातार कहा, चीन ने घुसपैठ की

बीजेपी नेता सुब्रमणियम स्वामी ने भी इस रिपोर्ट का हवाला देते हुए सरकार से इस बारे में सवाल पूछा है और हालात को देखते हुए तुरंत कदम उठाने को कहा है। स्वामी लगातार चीन सीमा पर भारतीय क्षेत्र में चीन की घुसपैठ को लेकर सोशल मीडिया और दूसरे मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर सवाल उठाते रहे हैं लेकिन सरकार की तरफ से इस बारे में लगातार चुप्पी बरती जा रही है।

स्वामी ने पेंटागन रिपोर्ट का हवाला देते हुए मांग की है कि मोदी सरकार अरुणाचल प्रदेश में चीनी गांव की खबरों को गंभीरता से ले और चीनी सीमा पर अप्रैल 2020 से पहले की स्थिति को बहाल करे।  

प्रधानमंत्री के दावों पर तीखे सवाल

पेंटागन की रिपोर्ट आने के बाद चीनी घुसपैठ की खबरों को लेकर कांग्रेस पार्टी भी सरकार पर हमलावर हो गई है। पार्टी ने कहा है कि इस मामले में प्रधानमंत्री ने देश को गुमराह किया है। उन्होंने इस मामले में चीन को क्लीन चिट देते हुए दावा किया था कि भारतीय क्षेत्र में किसी ने भी घुसपैठ नहीं की है। कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने कहा कि प्रधानमंत्री को जवाब देना चाहिए और इसके साथ ही समय सीमा भी बतानी चाहिए कि कब तक सीमाओं पर अप्रैल 2020 वाली स्थिति बहाल हो जाएगी।

कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को देश से माफी मांगनी चाहिए क्योंकि उन्होंने सुरक्षा के नाम पर देश को अंधेरे में रखा। सही तथ्य नहीं बताए गए हैं। ऐसे में प्रधानमंत्री को अब एक समयसीमा तय करनी चाहिए। इसके अलावा उन्हें देश से माफी भी मांगनी चाहिए। कांग्रेस प्रवक्ता ने मीडिया से बातचीत करते हुए इस बारे में बीजेपी सांसद तपीर गावो के एक पत्र का भी उल्लेख किया। पिछले साल लिखे इस पत्र में बीजेपी सांसद ने भारतीय क्षेत्र में चीन के अतिक्रमण का जिक्र किया था और उस पर तुरंत ध्यान देने को कहा था। तपीर गाओ ने ये पत्र प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह को लिखा था। अपने पत्र में तपीर गाओ ने साफ लिखा था कि चीन ने भारतीय क्षेत्र में घुसपैठ की है और सरकार को तुरंत इस बारे में कदम उठाना चाहिए।

बीजेपी सांसद तपीर गाओ के इस पत्र में दी गई जानकारी और चेतावनी को प्रधानमंत्री और गृहमंत्री ने सिरे से खारिज कर दिया था और चीन को क्लीन चिट दे दी थी।

कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा चीन को दी गई क्लीन चिट भारत के इतिहास में एक काला अध्याय है क्योंकि चीन ने पूरी दुनिया में इसका इस्तेमाल किया हैं। उन्होंने आगे कहा कि, ये एक बहुत ही गंभीर मुद्दा है। प्रधानमंत्री को चीन को दी गई अपनी क्लीन चिट वापस लेनी चाहिए और राष्ट्र को एक समय सीमा के भीतर राष्ट्र को ये बताना चाहिए कि अप्रैल 2020  से पहले की स्थिति चीन के साथ हमारी सभी सीमाओं पर कब बहाल हो पाएगी।  चाहे वो देपसांग, गोगरा हॉट स्प्रिंग्स, दौलत बेग ओल्डी हो या अरुणाचल प्रदेश का इलाका।

पिछले साल डोकलाम विवाद के समय भी सीमा पर संघर्ष के समय पेंटागन ने इस बारे में  रिपोर्ट जारी की थी। पेंटागन ने अपनी रिपोर्ट में सैटेलाइट से मिली तस्वीरों का हवाला दिया था। बाद में भारतीय रक्षा मंत्रालय और विदेश विभाग ने भी इन घटनाओं को स्वीकारा। चीन ने डोकलाम में हुए नुकसान और संघर्ष की खबरों को काफी समय तक अपने मीडिया में नहीं आने दिया। बाद में उसने डोकलाम में थोड़े बहुत नुकसान की बात को स्वीकार किया।

फोटो सौजन्य – सोशल मीडिया

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