नई दिल्ली (गणतंत्र भारत के लिए क्षितीश ) : AI ने दुनिया की रफ्तार बदल दी है। चैटबॉट से लेकर सेल्फ ड्राइविंग टेक्नोलॉजी, हेल्थकेयर, सेमी कंडक्टर और डिफेंस तक इसका दायरा लगातार फैल रहा है। भारत भी इस नई डिजिटल क्रांति में बड़ी भूमिका निभाने की तैयारी कर रहा है। लेकिन AI की इस चमकदार दुनिया के पीछे पानी ऐसा संसाधन है, जिसके बिना इसकी रफ्तार थम सकती है।
AI और पानी का रिश्ता
सुनने में अजीब लग सकता है कि आखिर AI और पानी का क्या रिश्ता है? दरअसल, AI खुद पानी नहीं पीता, लेकिन उसे चलाने वाले विशाल Data Centres जरूर पानी की बड़ी मात्रा मांग सकते हैं। हजारों सर्वर जब लगातार AI के जटिल गणित को हल करते हैं तो जबरदस्त गर्मी पैदा होती है। इन सर्वरों को ठंडा रखने के लिए कुछ Data Centres में पानी आधारित Cooling Systems का इस्तेमाल किया जाता है। AI जितना ज्यादा Computing Power मांगता है, उतना ही बड़ा Data Centre Infrastructure खड़ा करना पड़ता है और कुछ परिस्थितियों में Cooling के लिए पानी की जरूरत भी बढ़ सकती है।
AI की बढ़ती भूख, पानी पर बढ़ता दबाव
AI का इस्तेमाल बढ़ने के साथ दुनिया भर में बड़े-बड़े Data Centres बनाए जा रहे हैं। इन केंद्रों में हजारों-लाखों सर्वर लगातार चलते हैं। AI के लिए होने वाली High-Performance Computing में सर्वर ज्यादा बिजली खर्च करते हैं और ज्यादा गर्मी पैदा करते हैं। इस गर्मी को नियंत्रित करने के लिए कुछ Data Centres में Water-based या Evaporative Cooling सिस्टम इस्तेमाल किए जाते हैं।
एक Data Centre की पानी की जरूरत
एक बड़े Data Centre में रोजाना 50 लाख गैलन तक पानी की खपत हो सकती है। भारत की समस्या यह है कि कई बड़े Industrial और Technology Hubs ऐसे इलाकों में विकसित हो रहे हैं जहां पहले से पानी पर दबाव है। गुजरात के Semiconductor Projects, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और तमिलनाडु के Data Centres तथा हैदराबाद के Pharmaceutical Clusters इसके उदाहरण है।
चिप बनाने में भी पानी जरूरी
सेमीकंडक्टर चिप बनाने के दौरान सिलिकॉन की बेहद पतली प्लेटों, जिन्हें सिलिकॉन वेफर कहा जाता है, की बार-बार सफाई करनी पड़ती है। इसके लिए सामान्य पानी इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। बेहद शुद्ध पानी चाहिए, जिसमें लगभग कोई अशुद्धि न हो।
भारत तेजी से एआई, सेमीकंडक्टर और आधुनिक तकनीक से जुड़े उद्योगों को बढ़ावा दे रहा है। इससे रोजगार, निवेश और अर्थव्यवस्था को फायदा हो सकता है, लेकिन इन उद्योगों के लिए पानी की भी बड़ी जरूरत होती है। इसलिए विकास ऐसा होना चाहिए जिससे स्थानीय लोगों और खेती के लिए पानी की कमी न हो।
पानी बचाने के तरीके जरूरी
उद्योगों में इस्तेमाल किए गए पानी को साफ करके दोबारा इस्तेमाल किया जा सकता है। ऐसी तकनीक अपनाई जा सकती है जिसमें पानी बार-बार एक ही व्यवस्था में घूमता रहे और उसकी बर्बादी कम हो। आने वाले समय में यह संभव है कि किस जगह सेमीकंडक्टर फैक्ट्री बनेगी, कहां एआई डेटा सेंटर लगेगा और कहां कोई बड़ा उद्योग स्थापित होगा—इन फैसलों में पानी की उपलब्धता भी अहम भूमिका निभाएगी।
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