नई दिल्ली (गणतंत्र भारत के लिए शोध डेस्क) : पिछले दिनों, रूस ने यह दावा किया कि उसने कैंसर की वैक्सीन तैयार कर ली है और वह उपय़ोग के लिए उपलब्ध है। रूस ने यह भी कहा कि, वह यह वैक्सीन दुनिया के दूसरे देशों को मुफ्त में उपलब्ध कराने को तैयार है। लेकिन उसके बाद क्या हुआ इसके बारे में ज्यादा चर्चा नहीं हुई। भारत में भी काफी संख्या में लोग कैंसर से पीड़ित हैं और अगर ऐसा हुआ तो इससे भारत को बहुत फायदा होने वाला है। गणतंत्र भारत ने इसी दृष्टि से रूस के इस दावे की खोज-पड़ताल की।
यह दावा कि रूस ने कैंसर की वैक्सीन बना ली है, आकर्षक जरूर है, लेकिन इसे पूरी तरह सत्य मान लेना अभी जल्दबाज़ी होगी। हकीकत यह है कि रूस सहित दुनिया के कई देश, जैसे, अमेरिका, जर्मनी, ब्रिटेन, कैंसर के लिए थेरैप्यूटिक (उपचारात्मक) वैक्सीन पर काम कर रहे हैं। रूस ने हाल के वर्षों में mRNA आधारित कैंसर वैक्सीन के विकास की दिशा में प्रगति का दावा किया है, लेकिन यह अभी अनुसंधान और परीक्षण (clinical trials) के चरण में है, न कि व्यापक उपयोग के लिए स्वीकृत (approved) दवा के रूप में उपलब्ध है।
कैंसर आज दुनिया की सबसे बड़ी स्वास्थ्य चुनौतियों में से एक है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, हर साल करोड़ों लोग कैंसर से प्रभावित होते हैं और लाखों लोग अपनी जान गंवाते हैं। भारत जैसे देश में भी कैंसर तेजी से बढ़ती समस्या है, जहां देर से पहचान, महंगे इलाज और जागरूकता की कमी इसके इलाज में बड़ी बाधाएं हैं।
ऐसे में कैंसर की वैक्सीन की खबर किसी उम्मीद से कम नहीं लगती। रूस द्वारा कैंसर वैक्सीन विकसित करने का दावा इसी उम्मीद को और बढ़ाता है। लेकिन यह समझना जरूरी है कि यह वैक्सीन क्या है, कैसे काम करती है और वास्तव में मरीजों के लिए इसका क्या अर्थ है।
कैंसर वैक्सीन क्या होती है?
सबसे पहले यह स्पष्ट करना जरूरी है कि कैंसर वैक्सीन दो प्रकार की होती हैं :
प्रिवेंटिव (रोकथाम वाली) वैक्सीन
ये वैक्सीन कैंसर होने से पहले ही बचाव करती हैं। जैसे कि,
- HPV वैक्सीन (सर्वाइकल कैंसर से बचाव)
- हेपेटाइटिस B वैक्सीन (लिवर कैंसर से बचाव)
थेरैप्यूटिक (उपचारात्मक) वैक्सीन
ये वैक्सीन पहले से कैंसर से पीड़ित मरीजों के इलाज में मदद करती हैं।
रूस की जिस वैक्सीन की चर्चा है, वह इसी श्रेणी में आती है।
रूस की कैंसर वैक्सीन: दावा और वास्तविक स्थिति
रूस के वैज्ञानिकों और सरकारी संस्थानों ने हाल ही में दावा किया है कि वे एक mRNA आधारित कैंसर वैक्सीन विकसित कर रहे हैं। यह तकनीक वही है, जो कोविड-19 वैक्सीन (Pfizer, Moderna) में उपयोग हुई थी।
मुख्य विशेषताएं (दावे के अनुसार):
- यह वैक्सीन मरीज के व्यक्तिगत कैंसर प्रोफाइल के अनुसार बनाई जाएगी ।
- यह शरीर की इम्यून सिस्टम (प्रतिरक्षा प्रणाली) को कैंसर कोशिकाओं पर हमला करने के लिए प्रशिक्षित करेगी।
- इसे विशेष रूप से ट्यूमर-विशिष्ट एंटीजन के आधार पर डिजाइन किया जाएगा।
वास्तविक स्थिति:
- अभी यह वैक्सीन क्लिनिकल ट्रायल के चरण में है।
- व्यापक उपयोग के लिए इसे अभी मंजूरी नहीं मिली है।
- इसकी प्रभावशीलता और सुरक्षा पर अंतिम निष्कर्ष अभी आना बाकी है।
mRNA कैंसर वैक्सीन कैसे काम करती है?
mRNA वैक्सीन शरीर को यह सिखाती है कि कैंसर कोशिकाओं को कैसे पहचाना जाए।
काम करने की प्रक्रिया :
कैंसर कोशिकाओं के जीन का विश्लेषण किया जाता है ।
उनमें मौजूद विशेष एंटीजन पहचाने जाते हैं ।
mRNA के जरिए शरीर को यह जानकारी दी जाती है।
इम्यून सिस्टम उन कोशिकाओं पर हमला करना शुरू करता है।
इसका मतलब यह है कि इलाज व्यक्तिगत (personalized) होगा, जो हर मरीज के लिए अलग होगा।
मरीज और उपभोक्ता के लिए संभावित लाभ
अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल, इससे आम मरीज या उपभोक्ता को क्या फायदा होगा?
अधिक सटीक और व्यक्तिगत इलाज
आज कैंसर का इलाज अक्सर ‘वन-साइज-फिट्स-ऑल’ तरीके से होता है, जैसे कीमोथेरेपी। लेकिन यह वैक्सीन :
- हर मरीज के कैंसर के अनुसार तैयार होगी।
- साइड इफेक्ट कम हो सकते हैं ।
- इलाज ज्यादा प्रभावी हो सकता है।
साइड इफेक्ट्स में कमी
कीमोथेरेपी और रेडियोथेरेपी के गंभीर दुष्प्रभाव होते हैं :
- बाल झड़ना, कमजोरी, उल्टी, इम्यून सिस्टम कमजोर होना बहुत आम है। वहीं वैक्सीन आधारित इलाज कहीं अधिक लक्षित (targeted) होगा और शरीर की स्वस्थ कोशिकाओं को कम नुकसान होगा।
जीवन की गुणवत्ता में सुधार
कैंसर मरीजों के लिए सिर्फ जीवन बचाना ही नहीं, बल्कि जीवन की गुणवत्ता भी महत्वपूर्ण है।
यदि वैक्सीन, दर्द कम करे, सामान्य जीवन जीने में मदद करे तो यह एक बड़ा बदलाव होगा।
इलाज की अवधि में कमी
पारंपरिक इलाज लंबा और थकाऊ होता है। यदि वैक्सीन तेजी से काम करती है, तो अस्पताल में कम समय बिताना पड़ेगा। मरीज की आर्थिक और मानसिक स्थिति बेहतर होगी।
पुनरावृत्ति (Relapse) की संभावना कम करना
कैंसर का एक बड़ा खतरा है, उसका वापस आना। इम्यून सिस्टम को मजबूत करने वाली वैक्सीन, कैंसर कोशिकाओं को फिर से पनपने से रोक सकती है
भारत जैसे देश में कैंसर का इलाज बहुत महंगा है।
संभावित आर्थिक फायदे :
- लंबी अवधि में इलाज की लागत कम हो सकती है।
- बार-बार अस्पताल जाने की जरूरत कम होगी ।
- दवाओं और सर्जरी पर निर्भरता घट सकती है ।
हालांकि शुरुआती दौर में यह वैक्सीन महंगी हो सकती है, लेकिन जैसे-जैसे तकनीक विकसित होगी, इसकी कीमत कम होने की संभावना है।
चुनौतियां और चिंताएं
हर नई तकनीक के साथ कुछ चुनौतियां भी होती हैं :
लागत और पहुंच
अब सवाल यह है कि, क्या यह आम आदमी के लिए उपलब्ध होगी या यह केवल अमीर देशों तक सीमित रहेगी ?
तकनीकी जटिलता
हर मरीज के लिए अलग वैक्सीन बनाना चुनौतीपूर्ण है और इसके लिए उच्च स्तर की लैब और विशेषज्ञता चाहिए ।
दीर्घकालिक प्रभाव
अभी यह स्पष्ट नहीं है कि इसके लंबे समय के परिणाम क्या होंगे
नैतिक और नियामक मुद्दे
- क्या यह सभी देशों में जल्दी मंजूरी पा सकेगी?
- क्या इसके डेटा पारदर्शी होंगे?
भारत के संदर्भ में महत्व
भारत में कैंसर के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। यदि रूस या अन्य देशों की वैक्सीन सफल होती है तो भारत में भी इसका उपयोग हो सकता है। मेक इन इंडिया के तहत ऐसी वैक्सीन विकसित की जा सकती है एवं सरकारी योजनाओं (जैसे आयुष्मान भारत) के जरिए इसे सुलभ बनाया जा सकता है।
दुनिया में अन्य प्रयास
रूस अकेला देश नहीं है जो इस दिशा में काम कर रहा है। मॉडर्ना (अमेरिका) mRNA कैंसर वैक्सीन पर ट्रायल कर रही हैष इसके अलावा, जर्मनी में BioNTech व्यक्तिगत कैंसर वैक्सीन का ट्रायल चल रहा है। इंग्लैंड में ऑक्सफोर्ड युनिवर्सिटी इम्यूनोथेरेपी पर आधारित शोध में जुटी है। इससे यह स्पष्ट है कि कैंसर वैक्सीन एक वैश्विक प्रयास है।
क्या यह कैंसर का अंत है?
कैंसर एक जटिल बीमारी है। इसके कई प्रकार हैं। हर व्यक्ति में यह अलग तरह से विकसित होता है, इसलिए एक ही वैक्सीन से सभी तरह के कैंसर का इलाज संभव नहीं है।
नीतिगत सुझाव
यदि ऐसी वैक्सीन सफल होती है, तो सरकारों को इसे सस्ता और सुलभ बनाना होगा। पब्लिक हेल्थ सिस्टम में शामिल करना होगा। स्थानीय उत्पादन को बढ़ावा देना होगा एवं इसके लिए जागरूकता अभियान चलाने होंगे।
उम्मीद और यथार्थ के बीच संतुलन
रूस द्वारा कैंसर वैक्सीन के विकास का दावा चिकित्सा विज्ञान के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत है कि हम कैंसर के खिलाफ नई दिशा में बढ़ रहे हैं। हालांकि यह अभी प्रारंभिक चरण में है, लेकिन इसके संभावित लाभ बेहद बड़े हैं, खासकर मरीजों और उपभोक्ताओं के लिए।
यह तकनीक, इलाज को व्यक्तिगत बनाएगी, साइड इफेक्ट्स कम करेगी और जीवन की गुणवत्ता बेहतर करेगी। लेकिन हमें यह भी समझना होगा कि, यह अभी अंतिम समाधान नहीं है इसके लिए और शोध, परीक्षण और समय की जरूरत है।
भारत में स्थिति
भारत में कैंसर अनुसंधान और उपचार दोनों क्षेत्रों में पिछले एक दशक में तेज़ प्रगति हुई है, लेकिन तस्वीर पूरी तरह संतुलित नहीं है। कुछ क्षेत्रों में विश्वस्तरीय काम हो रहा है, तो कुछ जगहों पर अभी भी बुनियादी सुविधाओं की कमी है।
भारत में कैंसर अनुसंधान की वर्तमान स्थिति
संस्थागत ढांचा : मजबूत आधार, पर असमान विस्तार
भारत में कैंसर रिसर्च का मुख्य आधार सरकारी और निजी संस्थान हैं। ICMR (Indian Council of Medical Research), AIIMS (नई दिल्ली और अन्य शाखाएं), Tata Memorial Centre (मुंबई), National Institute of Cancer Prevention and Research (NICPR) एवं ACTREC (Advanced Centre for Treatment, Research and Education in Cancer) जैसे संस्थानों ने, कैंसर के कारणों, भारतीय जनसंख्या में कैंसर के पैटर्न एवं सस्ती दवाओं और उपचार मॉडल
पर महत्वपूर्ण काम किया है।
भारत में बेहतर इलाज कहां?
भारत में इलाज कहां बेहतर है, इसका जवाब इस बात पर निर्भर करता है कि, कैंसर का प्रकार क्या है? वह किस स्टेज पर है और मरीज की आर्थिक स्थिति कैसी है?
फिर भी कुछ संस्थान लगातार उच्च गुणवत्ता के लिए जाने जाते हैं, जैसे कि, Tata Memorial Hospital, मुंबई। यह भारत का सबसे प्रतिष्ठित कैंसर अस्पताल है। यहां कम लागत में विश्वस्तरीय इलाज मिलता है और साथ ही रिसर्च और क्लिनिकल ट्रायल दोनों में अग्रणी है। यहां दवाएं काफी सस्ती हैं, अनुभवी डॉक्टर हैं और जटिल मामलों का इलाज भी कुशलता के साथ किया जाता है।
AIIMS, नई दिल्ली। यहां मल्टी-डिसिप्लिनरी कैंसर केयर की सुविधा है एवं उन्नत तकनीक और विशेषज्ञता की उपलब्धता है। मरीज उपभोक्ता को यहां कम लागत में उच्च गुणवत्ता वाला इलाज मिल जाता है।
Regional Cancer Centres (RCCs)। किदवई मेमरोयल इंस्टीट्यूट बेंगलुरू एवं अडयार कैंसर इंस्टीट्यूट, चेन्नई भी काफी नामी-गिरामी कैंसर संस्थान हैं। यहां मरीज को क्षेत्रीय स्तर पर इलाज मिल जाता है और वह भी कम लागत में।
निजी क्षेत्र में Apollo Hospitals (दिल्ली, चेन्नई, हैदराबाद) में कैंसर की रोबोटिक सर्जरी 0एवं प्रिसिजन ऑन्कोलॉजी की सुविधा उपलब्ध है। Fortis, Medanta, Max Healthcare में अत्याधुनिक मशीनें एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर के डॉक्टर हैं। मरीज को यहां कम प्रतीक्षा समय में बेहतर सुविधाएं मिल जाती हैं लेकिन ये अस्पतला बहुत महंगे हैं।
विशेष कैंसर केंद्र (Specialized Institutes)
HCG (HealthCare Global)। यह विशेषकर कैंसर अस्पताल है और कई शहरों में इसके नेटवर्क हैं।
Rajiv Gandhi Cancer Institute (दिल्ली) भी विशेषतौर पर कैंसर के उपचार में विशेषज्ञता रखता है।
फोटो सौजन्य – सोशल मीडिया

