नई दिल्ली (गणतंत्र भारत के लिए लेखराज) कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने एक ट्वीट किया है। इस ट्वीट में भारतीय जनता पार्टी पर कई तरह के आरोप लगाए गए हैं। राम मंदिर में चंदा चोरी से लेकर उसके मंत्रियों और मुख्यमंत्रियों को कठघरे में खड़ा किया गया है। किसी पर जमीन घोटाले का आरोप है तो कोई सरकारी सब्सिडी खा रहा है। पर्यावरण से लेकर एथेऩॉल तक सभी मसलों पर आरोपों की फेहरिस्त है। लेकिन अपन को क्या ? अपन की दिलचस्पी तो बस दिल्ली चलाने वालोें की कुर्सी में है। इंद्रप्रस्थ का मामला है, रेखा जी कुर्सी संभाल रही हैं। जय़राम रमेश ने उनकी कार्य शैली पर भी सवाल उठाया है। ट्वीट से कुछ झोल समझ में आया तो लेखराज मामले को समझने टूलते-टूलते पहुंच गए दिल्ली सचिवालय।
मुख्यमंत्री कार्यालय़ में मामला बहुत गरमाया हुआ सा लगा। समझ नहीं आ रहा था कि क्या हुआ? कोई कुछ बताने को तैयार नहीं। अफसर मुंह खोलने को तैयार नहीं। हर कोई किन्हीं एच-जी और पी-जी का जिक्र कर रहा था। पूछने पर कोई एच-जी-पी-जी को डिकोड करने को राजी नहीं। लेखराज की दिलचस्पी थोड़ी और जागी और लग गए एच-जी-पी-जी के रहस्य का पता लगाने में।
बड़ी मुश्किल से एक अफसर को पटाय़ा लेकिन बंदे को मानना पड़ेगा लेखराज से ही खेल गया। अव्वल तो कुछ बताय़ा नहीं और जो कुछ बताया भी तो वह भी इशारों –इशारों में ही। लेखराज भी कहां मानने वाले थे। इतना तो समझ में आ गया कि मामले का तार सबसे ऊपर से जुड़ा है, लिहाजा दिलचस्पी और जागी और जुट गए अपने सूत्रों को खंगालने में। जो कुछ पता चला वह तो चौंकाने वाला था।
उसके सूत्र भी खोलूंगा। लेकिन सबसे पहले उस सूत्र की पहली कड़ी के रूप में दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के सोशल मीडिया पर आ रहे वीडियोज़ के बारे में समझिए। आप पूछेंगे इसमें नया क्या है, सभी मुख्यमंत्रियों का अपना सोशल मीडिया अकाउंट होता है। उस पर कुछ न कुछ राज्य की उपलब्धियों का उल्लेख होता है। मुख्यमंत्री जिस बात को अपनी उपलब्धि के रूप में गिनाना चाहते या चाहती हैं वह सोशल मीडिया अकाउंट पर दिखता है।
लेकिन, फर्क यहीं है। पता चला कि, दिल्ली की मुख्यमंत्री का सोशल मीडिया अकाउंट जो लोग भी चलाते या निर्देशित करते हैं वो लोग ही एच-जी और पी-जी के नाम से जाने जाते हैं। और खोजबीन की तो पता चला कि मुख्यमंत्री के सोशल मीडिया अकाउंट को मैनेज करने के लिए जो टीम बनी है उसमें अधिकारियों के अलावा, एच-जी और पी-जी की सबसे सक्रिय भूमिका है। एच-जी नाम का शख्स कहीं विदेश में है और वहीं से बाकायदा हुक्म आता है। पी-जी साहब कोई सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर हैं जिनकी घुसपैठ मुख्यमंत्री कार्यालय में हो चुकी है और इसका माध्यम वही एच-जी साहब हैं। अब ये साहब सोशल मीडिया इंफ्लुयंसर हैं तो काम भी उसी अंदाज में करते हैं।
हर बात में सरकार नहीं मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता का ही महिमामंडन। दिल्ली सरकार में और कहीं कुछ नहीं, जो कुछ है बस रेखा गुप्ता। बताया ऐसे जाता है कि, उन्हीं के जागे दिन और उन्हीं के सोए रात। क्यों भाई ऐसा क्यों करते हो? सरकार नाम की भी चीज़ है। रेखा जी उसी सरकार की मुखिया है। कम से कम उनकी सरकार की भी कुछ फिक्र कर लेते।
सब जानते हैं कि हर सरकार अपनी उपलब्धियों को प्रचारित-प्रदर्शित करती है। उसके लिए बाकयदा हर सरकार के पास सूचना एवं जनसंपर्क विभाग होता है। कुछ करीबियों की नियुक्तियां अलग से होती हैं। कुल मिलाकर प्रचार-प्रसार का जिम्मा सूचना-एवं जनसंपर्क विभाग के साथ मिलकर इन्हीं लोगों का होता है। लेकिन, यहां तो कहानी ही कुछ और है। ये लोग तो इन एच-जी से बस निर्देश लेते हैं और पी-जी उसकी अनुपालना में जुट जाते हैं। बाकी सब के बारे में कुछ न कहें, यही अच्छा है।
लेखराज को सुनने में यह भी आया कि मुख्यमंत्री कार्यालय में तैनात एक पूर्व मुख्यमंत्री के बेटे ने इसी सरखपाई से तंग आकर अपना पद छोड़ दिया। खैर, लेखराज ने भी ठान लिया है कि इस एच-जी और पी-जी के पहेली का पता लगा कर रहेंगे। कुछ-कुछ पता भी चला है लेकिन थोड़ा और पुख्ता कर लें फिर खुल्मखुल्ला जिक्र होगा।
उससे पहले, कुछ सवाल मुख्यमंत्री जी से। मुख्यमंत्री जी, आपके पास सूचना-जनसंपर्क विभाग है। ढेर सारे लोग आपने अलग से बैठा रखे हैं। आपको एच-जी और पी-जी जैसे लोगों की क्यों जरूरत आ पड़ी? मुख्यमंत्री की कुर्सी एक भारी –जनादेश और जनविश्वास का प्रतिनिधित्व करती है, उसकी उपलब्धियों को गिनाने के लिए किसी इन्फ्लुएंसर की जरूरत क्या आपको शोभा देती है?
लेखराज का माथा तो उसी दिन ठनका था जिस दिन मुख्यमंत्री को सोशल मीडिया पोस्ट में एक डॉक्टर को बेइज्जत करते देखा था। रेखा गुप्ता जी, आप खुद सोचिएगा कि क्या आपको इस तरह से पब्लिकली किसी वरिष्ठ पदेन अधिकारी और वह भी डॉक्टर को बेइज्जतत करना शोभा देता है? अगर आपमें संवेदना होगी जो जरूर इस बात पर ध्यान देंगी। मुख्यमंत्री कार्यालय और सरकार दिल्ली की जनता के विश्वास का प्रतीक होना चाहिए और उसे बनाए रखना की सबसे बड़ी जिम्मेदारी तो आपकी ही है।
फोटो साभार – सोशल मीडिया

