Homeअन्यकैंसर के हर मरीज़ के लिए अलग वैक्सीन....!

कैंसर के हर मरीज़ के लिए अलग वैक्सीन….!

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नई दिल्ली ( गणतंत्र भारत के लिए क्षितीश ) :  सोचिए, कैंसर के इलाज के बाद डॉक्टर आपके शरीर में बची हुई कैंसर कोशिकाओं को पहचानने के लिए आपके अपने ट्यूमर के हिसाब से तैयार की गई वैक्सीन दें। यही नई चिकित्सा अब कैंसर की लड़ाई में उम्मीद की एक बड़ी किरण बनकर सामने आई है। एक बड़े ट्रायल में व्यक्तिगत वैक्सीन को इम्यूनोथेरेपी दवा के साथ देने पर हाई-रिस्क त्वचा कैंसर के मरीजों में बीमारी दोबारा लौटने का समय बढ़ा है। हालांकि, विशेषज्ञों ने अभी इसे लेकर सावधानी बरतने की सलाह दी है, क्योंकि पूरे नतीजे अभी सार्वजनिक और स्वतंत्र रूप से समीक्षा किए जाने बाकी हैं।

कैंसर के खिलाफ वैक्सीन का बड़ा ट्रायल

यह वैक्सीन Merck/MSD और Moderna ने विकसित की है। इसे हाई-रिस्क मेलानोमा यानी त्वचा के एक गंभीर प्रकार के कैंसर से जूझ रहे मरीजों को सर्जरी के बाद दिया गया। फेज-3 ट्रायल में 1,000 से ज्यादा मरीज शामिल हुए। इनमें स्टेज-2, स्टेज-3 और स्टेज-4 तक के हाई-रिस्क मरीज थे।

दवा के साथ दिया गया वैक्सीन का डोज

इस वैक्सीन का नाम Intismeran बताया गया है। इसे Keytruda नाम की इम्यूनोथेरेपी दवा के साथ दिया गया। कंपनियों के मुताबिक, अकेले Keytruda की तुलना में वैक्सीन और दवा के संयोजन ने मरीजों को ज्यादा समय तक कैंसर-मुक्त रखने में मदद की।

कैसे काम करती है यह खास वैक्सीन?

यह कोई सामान्य वैक्सीन नहीं है। वैज्ञानिक पहले मरीज के ट्यूमर का छोटा हिस्सा निकालते हैं। इसके बाद उसके DNA की सीक्वेंसिंग की जाती है। इससे कैंसर कोशिकाओं में मौजूद खास म्यूटेशन की पहचान की जाती है।

हर मरीज के लिए अलग तैयारी

इन जानकारियों के आधार पर मरीज के लिए एक पर्सनलाइज्ड mRNA वैक्सीन तैयार की जाती है। इसका मकसद मरीज की प्रतिरक्षा प्रणाली को उन खास कैंसर कोशिकाओं को पहचानने और उन पर हमला करने के लिए तैयार करना है, जो सर्जरी के बाद शरीर में बच सकती हैं।

कैंसर के फैलने का खतरा भी घटा

कंपनियों का कहना है कि वैक्सीन और Keytruda के संयोजन से कैंसर-मुक्त रहने का समय बढ़ा और बीमारी के शरीर के दूसरे अंगों तक फैलने का जोखिम भी कम हुआ।

विशेषज्ञों ने बताया अहम कदम

NHS England के कैंसर विशेषज्ञ प्रोफेसर पीटर जॉनसन ने इसे बेहद महत्वपूर्ण प्रगति बताया। उनके मुताबिक, यह उपचार इम्यून सिस्टम को कैंसर की पहचान के लिए ज्यादा खास तरीके से निर्देशित करने की दिशा में आगे बढ़ता है।

अभी उत्साह के साथ सावधानी भी जरूरी

हालांकि, विशेषज्ञ इसे तत्काल कैंसर का इलाज या गारंटी नहीं मान रहे हैं। ट्रायल के शुरुआती नतीजे सकारात्मक हैं, लेकिन पूरे परिणाम अभी जारी नहीं हुए हैं और स्वतंत्र विशेषज्ञों द्वारा peer review भी बाकी है।

मरीजों को कब मिलेगी वैक्सीन?

ट्रायल पूरा होने के बाद भी इस उपचार को नियामकीय मंजूरी की जरूरत होगी। इसके बाद ही इसे व्यापक रूप से मरीजों के लिए उपलब्ध कराया जा सकेगा।

सिर्फ मेलानोमा तक सीमित नहीं

Moderna और Merck इसी तरह की पर्सनलाइज्ड वैक्सीन पर फेफड़े, ब्लैडर और किडनी कैंसर के लिए भी काम कर रही हैं। यानी भविष्य में इस तकनीक का इस्तेमाल दूसरे कैंसर में भी हो सकता है।

कैंसर की वैक्सीन का बदलता मतलब

अब तक वैक्सीन का नाम सुनते ही संक्रमण से बचाव का ख्याल आता था। लेकिन पर्सनलाइज्ड कैंसर वैक्सीन का विचार बिल्कुल अलग है। इसका लक्ष्य बीमारी से पहले सुरक्षा देना नहीं, बल्कि मरीज के शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को कैंसर की बची हुई कोशिकाओं को पहचानने में मदद करना है।

बड़ी उम्मीद, लेकिन लंबा रास्ता बाकी

Cancer Research UK की विशेषज्ञ डॉ. Talisia Quallo ने भी इन नतीजों को उम्मीद जगाने वाला बताया, लेकिन कहा कि अंतरिम डेटा की पूरी समीक्षा जरूरी है।

क्या यह कैंसर इलाज में गेमचेंजर बनेगी?

ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के मेडिकल ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. Lennard Lee के मुताबिक, यह मेलानोमा मरीजों के लिए अच्छी खबर है और इसके व्यापक मायने भी हो सकते हैं। उनके अनुसार, यह इस बात का प्रमाण देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है कि पर्सनलाइज्ड कैंसर वैक्सीन काम कर सकती हैं।

 फोटो सौजन्य- सोशल मीडिया

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